छींक आना कैसा है । छींक का अर्थ ?

छींक आना कैसा है ।



छींक आ जाए तो बद शागुनी मानना

कुछ जगहों पर हमारे जाहिल मुसलमान भाई छींक आने को बुरा जानते हैं और उससे बद शगुनी लेते हैं हालांकि छींक आना इस्लाम में अच्छी बात है और छींक अल्लाह को पसंद है।

इस लिए छींक आए तो अल्लाह का शूकर करें हदीस शरीफ़ में है।

हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम फरमाते हैं।

बेशक अल्लाह तआला छींक को पसंद और जिमाही को ना पसंद फरमाता है तो जिसको छींक आए वह {अल्हमदो लिल्लाह} कहे, और जो दूसरा शख्स उसको सुने तो { यारहमुकल्लाह } कहें,

और जिमाही शैतान की तरफ से है उसको जहां तक बस चले आने ना दें और जिमाही में जो मुंह से आवाज़ निकलती है उसको सुनकर शैतान हंसता है।

📚 {बुखारी शरीफ, जिल्द 1, सफाः 919}






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