मुस्लिम शादी की रस्में हिंदी में--Muslim wedding rituals in Hindi

   मुस्लिम शादी की रस्में हिंदी में--Muslim wedding rituals in Hindi

Muslim wedding rituals in Hindi


निकाह एक इबादत है और इबादत उसी वक्त इबादत कहलाएगी जब उसको रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के तरीक़े पर हुक्मे खदावन्दी और कुरबेइलाही का ज़रिया समझ कर किया जाए


दुसरी मज़हब की तरीक़े पर निकाह करने से ये इबादत सुन्नते नबविया से निकल कर सिर्फ़ रस्मो रिवाज बनता चला जायेगा जिससे उसकी बरकत खत्म होती जायेगी 


📝  हदीस शरीफ़     

हज़रत आयशा रज़ीअल्लाहो तआला अनहा से रवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने ईरशाद फ़रमाया, सबसे बा बरकत निकाह वह है जिसमें सबसे कम मुशक्कत (कम खर्च ) हो ।

📚{मिशकात शरीफ़ 2/268}

इस लिए शादी के मौक़ा पर शरई हुदूद में रहते हुए लड़की को मेहंदी लगाने और ज़िबोजीनत कराने में कोई क़बाहत नहीं है 

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📝     सवाल       

शादी के मौक़ा पर औरतों को मेहंदी लगाना कैसा है?

📝     जवाब       

औरतों को मेहंदी लगाना जायेज़ है लेकिन बिला ज़रूरत छोटी बच्चियों के हाथ पांव में मेहंदी लगाना नहीं चाहिए बड़ी लड़कियों के हाथ पांव में लगा सकते हैं

📚{कानूने शरीअत जिल्द 2}


📝  हदीस शरीफ़     

औरतों को चाहिए कि हाथ पांव पर मेहंदी लगाए ताकि मर्दों के हाथ की तरह हाथ ना हो और अगर किसी वजह से या बे एहतियाती में किसी गैर मर्द को दिख जाए तो उसे पता ना चले कि औरत किस रंग की है यानी गोरी है या काली क्यूंकि हाथों के रंग को देख कर भी चेहरे का अंदाज़ा लगाया जा सकता है एक हदीस में इरशाद है कि ज्यादा ना हो तो मेहंदी से नाखून ही रंगीन रखें 

📚{फतावा रजविया, जिल्द 9}

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📝   सवाल      

मर्द को शादी के मौक़ा पर मेहंदी लगाना कैसा है?

📝   जवाब     

हुक्म ये है कि मर्द को बगैर किसी वजह से औरतों की तरह हाथ पांव में मेहंदी लगाना ममनू व नजाइज व गुनाह है क्यूंकि इस में औरतों की मुशाबहत पाई जाती है

जैसा कि बुखारी शरीफ़ में है

अल्लाह रब्बुल इज्ज़त की लानत उन मर्दों पर जो औरतों से मुशाबेह करे (यानी औरतों वाली काम करे) और उन औरतों पर जो मर्दों के मुशाबेह करे (यानी मर्दों वाली काम करे)

और ऐसे ही एक सवाल के जवाब में हुज़ूर आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां फाज़ीले बरेलवी अलैहीर रहमां फ़रमाते हैं कि

मर्द को हथेली या तलवे बल्की सिर्फ़ नाखूनों ही में मेहंदी लगानी हराम है कि औरतों से मुशाबे है 

📚{फतावा रजविया, जिल्द 9}

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📝   सवाल     

शादी के मौक़ा पर दूल्हा को हल्दी लगाना कैसा है ?

📝  जवाब      

हल्दी और मेहंदी औरतों को लगाई जाती है मर्दों को नहीं जब कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम मर्दों को औरतों की मुशाबेहत और औरतों को मर्दों की मुशाबेहत इखत्यार करने से मना फ़रमाया है

 इस लिए औरतों के साथ मुशाबेहत होने की वजह से दुल्हा को हल्दी या मेहंदी लगाना दुरूस्त नहीं है और अगर ये किसी गैर कौम की रस्म है तो भी उसकी पैरवी करने से बचना चाहिए  

 📚{सुनन अबी दाऊद 60/4}

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