सवाल।
अज़ान के वक्त बात करते रहना चाहिए या नहीं ?
जवाब।
अज़ान के वक्त बात करते रहना ये एक आम बात हो गई है, अवाम तो अवाम कुछ इल्म वाले भी इसका ख्याल नहीं रखते जब कि हदीस शरीफ़ में है,
जो अज़ान के वक्त बातों में मशगूल रहे उस पर खातेमा बुरा होने का खौफ है,
मस अला ये है कि जब अज़ान हो तो उतनी देर के लिए सालम, बात चीत और सलाम का जवाब तमाम काम बन्द कर दें,
यहां तक कि क़ुरान मजीद की तिलावत में अगर अज़ान की आवाज़ आए तो तिलावत रोक दे और अज़ान गौर से सुने और जवाब दे,
रास्ता चलने में अज़ान की आवाज़ आ जाए तो उतनी देर खड़ा हो जाए, अज़ान सुने और जवाब दे,
अगर चन्द आज़ानें सुनें तो सिर्फ़ पहली का जवाब देना सुन्नत है और सब का देना भी बेहतर है।
📚{बहारे शरीअत, जिल्द 3, सफा 36}
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