कब्रिस्तान में चिराग़ और मोमबत्ती जलाना और अगरबत्ती या लोबान सुलगाना कैसा है ?

 

सवाल


कब्रिस्तान में चिराग़ और मोमबत्ती जलाना और अगरबत्ती या लोबान सुलगाना कैसा है ?

{ मसअला }

शबे बारात वगैरह के मौक़ा पर कब्रिस्तान में चिराग़ ,मोमबत्ती जलाई जाती है और अगरबत्ती ,लोबान सुलगाई जाती है 

इस बारे में ये जान लेना ज़रूरी है कि बिलकुल क़ब्र के ऊपर चिराग़ और मोमबत्ती जलाना और अगरबत्ती और लोबान सुलगाना मना है,

क़ब्र से अलग किसी जगह पर ऐसा करना जाइज है,जब कि उन चीज़ों से वहां आने जाने और कुरान शरीफ और फातेहा वगैरह पढ़ने वालों को या रास्ते से चलने वालों को फायदा पहुंचाने की नियत हो तो,

लेकिन ये ख्याल करना कि इसकी रोशनी और खुशबू जो दफन है उनको पहुंचेगी जहालत, नादानी और गलत फहमी है,

दुनियां की रोशनियां और सजावटें जो कब्रिस्तानों में करते हैं जान लें कि ये सब मुर्दों को नहीं पहुंचती मुर्दों को सिर्फ़ सवाब ही पहुंचता है,

मुर्दा अगर जन्नती है तो उसके लिए जन्नत की खुशबू काफ़ी है, और जहन्नमी के लिए ना कोई रोशनी है ना कोई खुशबू।

{सही मुस्लिम, जिल्द 1, सफा 76} {फतावा रजविया, जिल्द 4, सफा 141}



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