कुरान करीम गीर जाए तो उसके बराबर तौल कर अनाज खैरात करना
कुरान करीम अगर हाथ या अलमारी से गीर जाए तो कुछ लोग उसको तौल कर बराबर वज़न का आटा, चावल खैरात करते हैं और इस खैरात को उसका कफ्फारा मानते हैं ये उनकी गलत फहमी है।
कुरान करीम जान बूझ कर गिरा देना या फेंकना तो बहुत ही ज्यादा बुरा काम है किसी भी मुसलमान से इसकी उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वह ऐसा करेगा।
और जो तौहीन वो तौकीर के लिए ऐसा करेगा वह तो खुला काफ़िर है तौबा करे, फिरसे कलमा पढ़े, निकाह हो गया हो तो फिर से निकाह करे,
लेकिन अगर धोखे से भूल मैं कुरान करीम हाथ से छूट गया या अलमारी वगैरह से गीर गाया तो उस पर कोई गुनाह नहीं भूल चूक माफ़ है।
लेकिन अगर फिर भी बतौर खैरात कुछ राहे खुदा में खर्च कर दे तो ये अच्छी बात है और निहायत मुनासिब और बेहतर है।
लेकिन कुरान शरीफ को तौलना और उसके वज़न के बराबर अनाज वगैरह खैरात करने को कफ्फारा समझना गलत फहमी है।
कुरान वो हदीस और फिकाह की किताबों में कहीं ऐसा नहीं आया है, हां सदका और खैरात एक बेहतर काम है
इस लिए जो कुछ आपसे हो सके थोड़ा या ज़्यादा राहे खुदा में खर्च कर दें और अगर नहीं किया तब भी गुनाह और अजाब नहीं होगा
📚{गलत फहमीयां और उनकी इसलाह, सफाह 169}
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